गोंडवाना सामाजिक नेतृत्व और नियंत्रण – रावेन शाह उईके

आलेख :: गोंडवाना  सामाजिक  नेतृत्व  और नियंत्रण 
रावेन शाह उईके 
आज वक्त की पुकार है… और यह पुकार सिर्फ सुनने के लिए नहीं, बल्कि उठ खड़े होने के लिए है!
गोंडवाना आंदोलन/ जनसमुदाय  आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहाँ से या तो वह अपने अस्तित्व को बचा सकता है, या फिर इतिहास के पन्नों में खो सकता है। इसका सबसे बड़ा कारण है—हमारे संगठनों में दूरगामी सोच और स्थायी सृजनात्मक शक्ति का अभाव।
जब पूरे देश के समुदाय अपनी पहचान और अधिकारों के लिए एकजुट होकर निर्णायक लड़ाई लड़ रहे हैं, तब आदिवासी समाज भी संघर्ष कर रहा है—लेकिन बिखरा हुआ, कमजोर और दिशाहीन!
दूसरे संगठनों ने अपनी एकता, अनुशासन और दूरदृष्टि के दम पर इतिहास रचा है। उन्होंने अपनी ताकत को पहचाना और उसे संगठित किया। लेकिन हमारे यहाँ संगठन नहीं, व्यक्ति बड़ा बनता जा रहा है! व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएँ सामूहिक उद्देश्य पर भारी पड़ रही हैं—और यही हमारी सबसे बड़ी कमजोरी है।
अब सवाल यह नहीं है कि समाज जागरूक है या नहीं…
सवाल यह है कि क्या उस जागरूकता को सही दिशा देने वाला नेतृत्व हमारे पास है?
अगर गोंडवाना समग्र विकास क्रांति आंदोलन/आदिवासी संगठन आज भी अपने छोटे-छोटे अहंकार और स्वार्थ से ऊपर नहीं उठे, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें कभी माफ नहीं करेंगी। उन्हें अपनी पहचान बचाने में 50 साल और गंवाने पड़ सकते हैं!
यह समय समझौते का नहीं, संकल्प का है।
यह समय बिखरने का नहीं, संगठित होने का है।
यह समय पीछे देखने का नहीं, इतिहास बनाने का है!
जल, जंगल और जमीन—ये सिर्फ संसाधन नहीं, हमारी आत्मा हैं!
हमारी पहचान, हमारा स्वाभिमान और हमारा अस्तित्व इनसे जुड़ा है।
और इन्हें बचाने के लिए हमें सिर्फ आवाज नहीं, बल्कि संगठित शक्ति बनना होगा!
गोंडवाना आंदोलन सहित आदिवासी संगठनों को अब एक नई दिशा लेनी होगी—जहाँ व्यक्ति नहीं, विचार बड़ा हो…
जहाँ पद नहीं, उद्देश्य सर्वोपरि हो…
जहाँ संघर्ष नहीं, बल्कि संगठित संकल्प दिखे!
यदि हम आज एकजुट होकर स्थायी और मजबूत आधारशिला नहीं रखेंगे, तो आने वाला समय हमें कमजोर और असफल साबित कर देगा।
लेकिन अगर हमने आज ठान लिया—तो कोई ताकत हमें आगे बढ़ने से रोक नहीं सकती!
उठो, संगठित हो जाओ, और अपने अस्तित्व की लड़ाई को निर्णायक बनाओ!
सशक्त सामाजिक नेतृत्व और प्रभावी नियंत्रण ही वह शक्ति है, जो इस आंदोलन को वैचारिक क्रांति में बदल सकती है।
अब नहीं तो कभी नहीं!
– गोंडवाना रावेनशाह उईके

Comments

Popular posts from this blog

गोंडवाना आंदोलन का सामाजिक राजनीतिक गणित

प्रश्न सशक्त गोंडवाना आंदोलन